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सुंदरकाण्ड से जुड़ी पाँच मुख्य बातें

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | अध्यात्म और धर्म

 

* भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥

श्री रघुवीर का यश भव (जन्म-मरण) रूपी रोग की (अचूक) दवा है। जो पुरुष और स्त्री इसे सुनेंगे, त्रिशिरा के शत्रु श्री रामजी उनके सब मनोरथों को सिद्ध करेंगे॥ सुंदरकाण्ड को हनुमानजी की सफलता के रूप में याद किया जाता है। श्रीरामचरित मानस में सात काण्ड हैं। इन्ही में से एक सुंदरकाण्ड रामचरित मानस के पांचवें अध्याय का नाम है। बता दें कि यहां काण्ड का अभिप्राय अध्याय से है।

सुंदरकाण्ड के अतिरिक्त सभी अध्यायों के नाम स्थान या स्थितियों के आधार पर रखे गए हैं। बाललीला का बालकाण्ड, अयोध्या की घटनाओं का अयोध्या काण्ड, जंगल के जीवन का अरण्य काण्ड, किष्किंधा राज्य के कारण किष्किंधा काण्ड, लंका के युद्ध का लंका काण्ड और जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर उत्तरकाण्ड में दिए गए हैं। इसलिए लोग यह जानना चाहते हैं कि श्रीरामचरित मानस के इस पांचवें अध्याय का नाम सुंदरकाण्ड ही क्यों रखा गया।

सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों रखा गया?

हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी।  त्रिकुटाचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे। और तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका थी। इसी वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी। इस कांंड की यही सबसे प्रमुख घटना थी, इसलिए इसका नाम सुंदरकांड रखा गया है !

शुभ अवसरों पर सुन्दरकाण्ड का पाठ क्यों-
शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है।

किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां हो, कोई काम नहीं बन पा रहा है, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकांड करने की सलाह देते हैं।

जानिए सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता है- माना जाता है कि सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं। सुंदरकांड के पाठ में बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। जो लोग नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं, उनके सभी दुख दूूर हो जाते हैं, इसमें हनुमानजी नें अपनी बुद्धि और बल से सीता की खोज की है। इसी वजह से सुंदरकांड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है।

मिलता है धार्मिक लाभ- वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग हैं। संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम कें गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती हैं, सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का है।

सुंदरकांड से मिलता है मनोवैज्ञानिक लाभ-
मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड हैं,सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती हैं, किसी भी कार्य को पूूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।
***********
आयुः श्रियं यशो धर्मं*
*लोकानाशिष एव च*।
*हन्ति श्रेयांसि सर्वाणि*
*पुंसो महदतिक्रमः*।।

*भावार्थ*:- *बडों का अपमान ,देवताओं का अनादर, तथा गुरूजनों का तिरस्कार करने वाले मनुष्य के आयु ,संपत्ति, यश ,धर्म ,लोगों की शुभ कामना ,इह लोक, परलोक यानि कि जो भी कल्याण कारी उत्तम मार्ग या प्राप्य चीजें हैं ,वो सारी की सारी नष्ट हो जातीं हैं और वह अधो गति को चला जाता है। इसलिए मनुष्य को यत्न पूर्वक बडों का सम्मान माता पिता की सेवा और देवताओं की आराधना करते रहना चाहिए।*

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*मंत्रशास्त्र के अनुसार दुर्वासा के शाप से सरस्वती ने इस नाम से कश्मीर में जन्म लिया। ब्रह्माजी मंडन मिश्र के रूप में आये तो इनकी पत्नी का नाम यह था  और आदि शंकराचार्य का प्रधान पीठ इनके नाम से है।*

1 ज्योति
2 माया
3 महासरस्वती
4 श्रृंगेरी
5 शारदा

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