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समुद्र शास्त्र के द्वारा मनुष्यों के किस प्रकार बोलने वाले इंसान का स्वभाव कैसा होता है-

astroadmin | April 13, 2018 | 2 | सामान्य जानकारी

ज्योतिष शास्त्र की एक शाखा समुद्र शास्त्र के द्वारा मनुष्यों के हाव-भाव, उनके शरीर पर स्तिथ चिन्हों, उनके शरीर के लक्षणों के आधार पर उनके स्वभाव के बारे बताया जाता है। प्रत्येक मनुष्य के बोलने का तरीका एक-दूसरे से भिन्न होता है। समुद्र शास्त्र व शरीर लक्षण विज्ञान के अंतर्गत मनुष्यों के बोलने के तरीकों पर गहन शोध किया गया है, जिसके आधार पर इंसान के स्वभाव के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि किस प्रकार बोलने वाले इंसान का स्वभाव कैसा होता है-

बोलने से जानिए स्वभाव

1- ऊंचे स्वर में बोलने वाले लोग दूसरे लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं या वे हठपूर्वक अपने अधूरे ज्ञान को दूसरों पर थोपना चाहते हैं। ऐसे लोग किसी दूसरे की बात सुनना पसंद नहीं करते।

2- समुद्र शास्त्र के अनुसार कुछ लोग इतनी तेजी से बोलते हैं कि किसी को पता भी नहीं चलता कि वे क्या बोलना चाहते हैं। ऐसे जातक में न तो किसी बात को छुपा कर रखने की क्षमता होती है और न ही उसमें किसी बात को स्पष्ट कहने का साहस होता है। ऐसे जातक धोखेबाज हो सकते हैं।

3- कुछ लोग जब बोलते हैं, तो उनकी वाणी में कर्कशता एवं टूटापन होता है। ऐसे लोग झगड़ालू, दु:खी एवं लक्ष्यहीन होते हैं।

4- कई लोगों के बोलने का अंदाज शेर की तरह गुर्राने के समान होता है। ऐसे लोग संयम युक्त, विद्वान, ज्ञानी, अध्ययन करने वाले, मनन तथा चिंतन प्रिय, गंभीर, सौम्य एवं धैर्यवान व उदार चरित्र के होते हैं।

5- धीरे से बोलने वाले, हकला कर बोलने वाले, असंतुलित व तारतम्यहीन बोलने वाले लोग अविकसित बुद्धि, अज्ञान, संकुचित प्रवृत्ति, धूर्त, कामचोर व असफल होते हैं।

6- गंभीर एवं संतुलित स्वर मानव मस्तिष्क की उच्च प्रवृत्तियों का सूचक होता है। ऐसे लोग अपने परिवार के प्रति जिम्मेदार होते हैं। ये समाजसेवा के कार्यों से जुड़े भी हो सकते हैं। ये हर काम व्यवस्थित तरीके से करना पसंद करते हैं।

7- यदि किसी महिला की आवाज सामान्य से अधिक ऊंची है, तो उसमें अहंकार, अनुशासन, नेतृत्व की क्षमता होती है। ये प्रशासनिक विभाग में किसी ऊंचे पद पर हो सकती हैं। परिवार पर भी इनका पूरा नियंत्रण रहता है।

8- सामान्य से कम स्वर वाली स्त्री में असत्य, निंदा, भ्रम, कलह, आत्मप्रशंसा आदि दुर्गुण होते हैं।

9- हंस, मयूर या कोयल के समान वाणी वाली स्त्री को सर्वगुण संपन्न माना गया है।

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