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शनि ग्रह एवम ज्योतिष

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | ज्योतिष सीखें

ज्योतिष में शनि और जातक ================== शनि कर्म कारक है, सेवक है, दास है, अनुशासन है, कानून है, मोक्ष कारक है, आलस्य है और बाड़ी में वायु विकार का कारक भी शनि है, लोहा, बड़ी बड़ी मशीनरी और बड़े बडे वाहनो का कारक शनि ही है | सुर्य का पुत्र होने के कारण सरकार से लाभ लेने में और सरकारी नौकरी के लिये शनि बहुत मददगार है, शनि की मदद के बिना बडा घर लेना, बडा वाहन लेना, बडा बिज़नस करना और सरकारी नौकरी लेना संभव नहीं है, हालकि नीच का शनि भी सरकारी नौकरी देता है लेकिन वो छोटे सतर की फ़ोर्थ कलास कर्मचारी जैसी नौकरी देता है |
यदि कुण्डली में शनि मित्र राशि में हो या मित्र ग्रह ( बुध, शुक्र) के साथ या फ़िर इनकी द्रिश्टी में हो तो यह जातक को लाभ देता है | शनि खास कर जातक की नौकरी और बिज़नस को प्रभावित करता है, मान सम्मान को प्रभावित करता है, चाल चलन को प्रभावित करता है, घर और ग्रहसथी के सुख को प्रभावित करता है, वाहन के सुख को प्रभावित करता है, और कुण्डली में शनि की अच्छी या बुरी स्थिति के आधार पर इन सब चीज़ो में जातक को ऐशो आराम या फ़िर तनाव का सामना करना पडता है |
शनि का बुध की राशि में होना या फ़िर बुध के साथ होना जातक को अच्छा बिज़नस मैन बनाता है, जातक को टैकनिकन नौलेज देता है जैसे चीज़ो को ठीक करने का काम, प्रापरटी डीलर का काम या फ़िर किसी भी तरह के मारकिट से रिलेटड काम कुछ भी खरीदने बेचने का काम जातक कर सकता है | अगर कुण्डली में शनि शुक्र की राशि में या शुक्र के साथ या द्रिश्टी में हो तो जातक साज सजावट से सम्बन्धित कार्य करता है, सोन्द्रय प्रोडकट से सम्बन्धित कार्य, चाहे घर को सजाने वाले प्रोडकट हो या फ़िर पार्लर से सम्बन्धित कार्य हो | ऐसे जातक की पत्नी जोब करने वाली होती है |
जीवन में ऐशो आराम की कमी नहीं रहती लेकिन समय की कमी के चलते दोनो ग्रहसथी के सुखो को नहीं भोग पाते, या फ़िर दोनो को एक दूसरे के साथ समय कम बिताने का मौका मिलता है, या फ़िर हो सकता है कि जातक का जीवनसाथी धन कमाने के लिये विदेश जाता हो, इस वझा से भी सुखो में कमी रहती है | यदि कुण्डली में शनि राहु के साथ या द्रिश्टी में हो तो जातक को जोब और बिज़नस से सम्बन्धित दिक्कतो का सामना करना पडता है, ऐसा जातक बार बार जोब बदलता रहता है, अगर खुद की दुकान है तो वो भी बदलता रहेगा, प्रोफ़ेशन में स्थाईतव नहीं होगा, थोडी देर नौकरी अच्छी चलेगी और बिना किसी कारण से अचानक से ही नौकरी बदलने का हालात बन ने लग जाते हैं |
अगर कुण्डली में शनि केतु के साथ या द्रिश्टी में है तो जातक छोटे सतर से शुरुआत करना ही नहीं चाहेगा, जातक छोटे सतर पर दुकान नहीं चलाना चाहेगा, जातक हमेशा ही बडा पलैन और बडा ही सोचेगा, एक एक दम से ही बड़ी दुकान कर लू मे, एक दम से ही बडी नौकरी मिल जाये मुझे, ऐसा जातक छोटी शुरुआत करना ही नहीं चाहेगा, जिसकी वझा से जीवन में दिक्कतो का सामना करना पडता है, बडी जोब मिलेगी नहीं और छोटी करेगा नहीं, बडी गाडी मिलेगी नहीं और छोटी खरीदेगा नहीं, बडा घर बनेगा नहीं और छोटा खरीदेगा नहीं, घर में नौकर नहीं टिकता आसानी से ऐसे लोगो के, क्युकि बात बात पर नौकरो से ही बहस होती रहती है या फ़िर नौकरो के कारण ही घर में नुकसान होते रहते हैं |

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