ज्योतिष वास्तु और किसी भी प्रकार के रत्न के लिये फोन करे – 7309053333

लहसुनिया या कैट्सआई

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | ज्योतिष सीखें , सामान्य जानकारी

लहसुनिया केतु का रत्‍न है जो कि बेहद चमकीला होता है। अपनी विशेष बनावट के कारण इसे अंग्रेजी में ‘कैट्स आई’ कहा जाता है। ये सफेद, काला, पीला और हरा चार रंगों में पाया जाता है जिनमें से प्रत्‍येक में धारियां होती हैं।

लहसुनिया रत्न की प्राकृतिक उपलब्‍धता:

यह रत्‍न भी दूसरे रत्‍नों की तरह खान से निकाला जाता है। इसकी खाने भारत, चीन, श्रीलंका, ब्राजील और म्‍यांमार में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि म्‍यांमार में पाया जाने वाला लहसुनिया सबसे अच्‍छी क्‍वालिटी का होता है।

विज्ञान और लहसुनिया:

यह बेरिलियम का एल्‍युमिनेट है। इसी कारण यह अंधेरे में बिल्‍ली की आंख जैसा चमकता है। इसका घनत्‍व 3.78 होता है और कठोरता 8.50होती है।

ज्‍योतिष और लहसुनिया रत्न:

जन्‍मकुंडली में केतु दूषित हो, दुर्बल हो या अस्‍त हो तो लहसुनिया पहनना लाभकारी होता है। कुंडली में निम्‍न बातें हो तो लहसुनिया पहना जा सकता है।

कुंडली में दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, नवें और दसवें भाव में यदि केतु उपस्थित हो तो लहसुनिया पहनना लाभकारी सिद्ध होता है।कुंडली के किसी भी भाव में अगर मंगल, बृहस्‍पति और शुक्र के साथ में केतु हो तो लहसुनिया अवश्‍य पहनना चाहिए।केतु सूर्य के साथ हो या सूर्य से दृष्‍ट हो तो भी लहसुनिया धारण करना फायदेमंद होता है।कुंडली में केतु शुभ भावों का स्‍वामी हो और उस भाव से छठे या आठवें स्‍थान पर बैठा हो तो भी लहसुनिया पहना जाता है।कुंडली में केतु पांचवे भाव के स्‍वामी के साथ हो या भाग्‍येश के साथ हो तो भी लहसुनिया पहनना चाहिए।कुंडली में केतु धनेश, भाग्‍येश या चौथे भाव के स्‍वामी के साथ हो या उनके द्वारा देखा जा रहा हो तो भी लहसुनिया पहनना चाहिए।केतु की महादशा और अंतरदशा में भी लहसुनिया धारण करना अत्‍यंत फलदायक होता है।केतु से संबंधित वस्‍तुओं और इससे संबंधित स्‍थानों में उन्‍नति के लिए भी लहसुनिया धारण करें।केतु अगर शुभ ग्रहों के साथ हो तो भी लहसुनिया धारण किया जाता है।भूत-प्रेत आदि से बहुत ज्‍यादा डर हो तो भी लहसुनिया पहन कर ऐसे डर को दूर किया जा सकता है।केतु से होने वाली जन्‍मदोष निवृत्ति के लिए भी लहसुनिया पहनना लाभदायक होता है।

लहसुनिया रत्न के गुण:

ये अपने आकार से ज्‍यादा वजन का लगता है। चमकदार और चिकना होता है साथ ही लंबी-लंबी सफेद धारियां होती हैं। अंधेरे में भी यह बिल्‍ली की आंख की तरह चमकता है। यह केतु का रत्‍न होता है और पहनने पर यह केतु से संबंधित दोष खत्‍म कर देता है।

लहसुनिया रत्न का प्रयोग

शनिवार को चांदी की अंगूठी में लहसुनियां लगवाकर ऊं कें केतवे नम: मंत्र 17000बार जप करना चाहिए। इस प्रकार लहसुनिया को जागृत कर उसे धारण करना चाहिए। इसे आधी रात को बीच की अंगुली में धारण करना चाहिए।

लहसुनिया रत्न के विकल्‍प

यदि लहसुनिया खरीदने में कोई असमर्थ हो तो संगी, गोदंत और गोदंती उसके उपरत्‍न हैं जिन्‍हें इसके स्‍थान पर धारण किया जा सकता है। इसके अलावा दरियाई लहसुनिया अर्थात टाइगर्स आई भी इसके स्‍थान पर धारण किया जा सकता है।

Related Posts

जन्म-कुंडली में दशम स्थान

astroadmin | January 8, 2019 | 0

जन्म-कुंडली में दशम स्थान- जन्म-कुंडली में दशम स्थानको (दसवां स्थान) को तथा छठे भाव को जॉब आदि के लिए जाना जाता है। सरकारी नौकरी के योग को देखने के लिए…

आज के दौर में ज्योतिष विद्या

astroadmin | January 8, 2019 | 0

आज के दौर में ज्योतिष विद्या के बारे में अनेकों भ्रान्तियाँ फैली हैं। कई तरह की कुरीतियों, रूढ़ियों व मूढ़ताओं की कालिख ने इस महान विद्या को आच्छादित कर रखा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक पन्चांग

तत्काल लिखे गये

फेसबुक

सबसे ज्यादा देखे जाने वाले

दिन के अनुसार देखे

January 2019
S M T W T F S
« Dec    
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  

स्तोत्रम

अब तक देखा गया

  • 50,197

नये पोस्ट को पाने के लिये अपना ईमेल लिख कर सब्सक्राइब करे


ज्योतिष वास्तु और किसी भी प्रकार के रत्न के लिये फोन करे – 7309053333
%d bloggers like this: