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महामृत्युञ्जय मन्त्र जप का लाभ

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | अध्यात्म और धर्म , सामान्य जानकारी

महामृत्युञ्जय मन्त्र पर विशेष
(1)मृत्युंजयहवनं खलु सर्वरुजां शान्तये विधेयं स्यात् ।
सर्वेष्वपि होमेषु ब्राह्मणभुक्तिस्तथा तथाप्तवच: ।।
भावार्थ- सभी प्रकार के रोगों की शांति के लिए मृत्युंजयहवनं करवाना चाहिए ।।और हवन के                  पश्चात ब्राह्मण भोजन भी करवाना चाहिए ।। ऐसा हमारे प्राचीन आचार्यों का कहना है ।।

(2) तीव्रज्वराभिचारादिशान्तिदं हवनं मतम्।
मृत्युंजयाख्यमनत्रेण नैव केवलमायुषे ।।
भावार्थ- मृत्युंजय मन्त्रसे किया जाने वाला हवन तेज बुखार एवं अभिचार , मारण , मोहन ,    स्तम्भन , विद्वेषण , उच्चाटन , एवं वशीकरण आदि तान्त्रिक प्रक्रियाओं को शान्त करने वाला कहागया है केवल आयु की वृद्धि के लिए ही नहीं अपितु समस्त शारिरिक कष्टों से छुटकारा पाने के लिए इसको करना चाहिए ।।

(3) ओउम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।
तीव्रज्वरे तीव्रतराभिचारे सोन्मोदके दाहगदे च मोहे ।
तनोति शान्तिं नचिरेण होम:संजीवनश्चाट सहस्त्र संख्या: ।।
भावार्थ- संजीवनी बूटी कि तरह काम करनेवाला यह मृत्युंजयहवन करने से अभिचार , उन्माद , दाह ऱोग और तांत्रिक क्रियाओं में शीध्र लाभ देता है ।।

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