ज्योतिष वास्तु और किसी भी प्रकार के रत्न के लिये फोन करे – 7309053333

मकर संक्रान्ति कब मनाई जाएगी

astroadmin | January 14, 2019 | 0 | अध्यात्म और धर्म

मकर संक्रांति साल 2019 में 14 जनवरी नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाई जा रही है धनु राशि से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे सौर्य मास से आज से माघ मास भी आरंभ हो जाता है और सूर्य आज से  उत्तरायण  हो गए है खरमास समाप्त हो जाएंगे और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. खरमास में मांगलिक कार्यों की मनाही होती है, लेकिन मकर संक्रांति से शादी और पूजा-पाठ जैसे कामों का शुभ मुहूर्त शुरू हो जाता है. इसी के साथ प्रयागराज में कुंभ भी मकर संक्रांति पर शुरू हो रहा है. इसी संक्रांति के दिन ही कुंभ मेले में भक्त त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं. मकर संक्रांति को दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है. गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण कहा जाता है. गुजरात में मकर संक्रांति के दौरान खास पंतग कॉम्पिटिशन भी होता है. वहीं, हरियाण और पंजाब में मकर संक्रांति को माघी के नाम से पुकारा जाता है. इसी वजह से इसे साल की सबसे बड़ी संक्रांति कहा गया है. क्योंकि यह पूरे भारत में मनाई जाती है. इसलिए यहां जानिए मकर संक्रांति

मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त
पुण्य काल मुहूर्त – 14/15रात्री 2 बजे से

मकर संक्रांति की पूजा व‍िध‍ि
मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है या फिर घर पर भी सुबह नहाकर पूजा की जाती है.
इस दिन भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की जाती है. इसी के साथ मकर संक्रांति के दिन पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण दिया जाता है

क्‍या है मकर संक्रांति?
सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांत कहते हैं. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है. एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति होती है. हालांकि कुल 12 सूर्य संक्रांति हैं, लेकिन इनमें से मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति प्रमुख हैं.
मकर संक्रांति का महत्‍व
इस संक्रांति के दौरान सूर्य उत्तरायण होते हैं यानी पृथ्‍वी का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है. उत्तरायण देवताओं का अयन है. एक वर्ष दो अयन के बराबर होता है और एक अयन देवता का एक दिन होता है. इसी वजह से मकर संक्रांति के दिन से ही शादियों और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है.

मकर संक्रांति का मंत्र
मकर संक्रांति पर गायत्री मंत्र के अलावा भगवान सूर्य की पूजा इन मंत्रों से भी पूजा की जा सकती है:
1- ऊं सूर्याय नम: ऊं आदित्याय नम: ऊं सप्तार्चिषे नम:
2- ऋड्मण्डलाय नम: , ऊं सवित्रे नम: , ऊं वरुणाय नम: , ऊं सप्तसप्त्ये नम: , ऊं मार्तण्डाय नम: , ऊं विष्णवे नम:

क्या होता है अयन
अयन दो तरह के होते हैं उत्तरायण और दक्षिणायन सूर्य के उत्तर दिशा में अयन (गमन) को उत्तरायण कहा जाता है. मान्‍यताओं की मानें तो उत्तरायण में मृत्यु होने से मोक्ष प्राप्ति की संभावना रहती है. सूर्य के उत्तरायण काल में ही शुभ कार्य किए जाते हैं. सूर्य जब मकर, कुंभ, वृष, मीन, मेष और मिथुन राशि में रहता है तब इसे उत्तरायण कहते हैं. वहीं, जब सूर्य बाकी राशियों सिंह, कन्या, कर्क, तुला, वृच्छिक और धनु राशि में रहता है, तब इसे दक्षिणायन कहते हैं. धार्मिक महत्व के साथ ही इस पर्व को लोग प्रकृति से जोड़कर भी देखते हैं  ऊर्जा देने वाले भगवान सूर्य देव की आराधना की जााती है

Related Posts

कल्पवास

astroadmin | January 10, 2019 | 0

कल्पवास वेदकालीन अरण्य संस्कृति की देन है। कल्पवास का विधान हज़ारों वर्षों से चला आ रहा है। जब तीर्थराज प्रयाग में कोई शहर नहीं था तब यह भूमि ऋषियों की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक पन्चांग

तत्काल लिखे गये

फेसबुक

सबसे ज्यादा देखे जाने वाले

दिन के अनुसार देखे

January 2019
S M T W T F S
« Dec    
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  

स्तोत्रम

अब तक देखा गया

  • 49,798

नये पोस्ट को पाने के लिये अपना ईमेल लिख कर सब्सक्राइब करे


ज्योतिष वास्तु और किसी भी प्रकार के रत्न के लिये फोन करे – 7309053333
%d bloggers like this: