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ब्राह्मणो ने समाज को तोड़ा नहीं बल्कि  जोड़ा है।

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | अध्यात्म और धर्म

 

ब्राह्मण ने विवाह के समय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े हरिजन को जोड़ते हुये अनिवार्य किया कि हरिजन स्त्री द्वारा बनाये गये चूल्हे पर ही सभी शुभ कार्य होंगे । इस तरह सबसे पहले हरिजन को जोड़ा गया …..
★ धोबन द्वारा दिये गये जल से ही कन्या सुहागन रहेगी। इस तरह धोबी को जोड़ा…
★ कुम्हार द्वारा दिये गये मिट्टी के कलश पर ही देवताओं का पूजन होगा, यह कहते हुये कुम्हार को जोड़ा…
★ मुसहर जाति जो वृक्ष के पत्तों से पत्तल-दोनिया बनाते हैं, यह कहते हुये जोड़ा कि इन्हीं के बनाए गये पत्तल दोनियों से देवताओ के पूजन सम्पन्न होंगे…
★ कहार जो जल भरते थे, यह कहते हुए जोड़ा कि इन्हीं के द्वारा दिये गये जल से देवताओ के पूजन होंगे…
★ विश्वकर्मा जो लकड़ी के कार्य करते थे उन्हें यह कहते हुये जोड़ा कि इनके द्वारा बनाये गये आसन चौकी पर ही बैठ कर वर-वधू देवताओ का पूजन करेंगे …
★ फिर वह हिन्दू जो किन्हीं कारणो से मुसलमान बन गये थे उन्हें जोड़ते हुये कहा कि इनके द्वारा सिले गये वस्त्रो  (जोड़े-जामे) को ही पहन कर विवाह सम्पन्न होंगे…
★ फिर मुसलमान की स्त्री को यह कहते हुये जोड़ा कि इनके द्वारा पहनायी गयी चूड़ियां ही वधू को सौभाग्यवती बनायेंगी…
★ धरिकार (जो डाल और मौरी बनाते हैं, जो दूल्हे के सर पर रख कर द्वारचार कराया जाता है) को यह कहते हुये जोड़ा कि इनके द्वारा बनाये गये उपहारों के बिना देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिल सकता।

इस तरह समाज के सभी वर्ग जब आते थे तब घर की महिलायें मंगल गीत  गायन करते हुये उनका स्वागत करती थीं
और पुरस्कार सहित दक्षिणा देकर विदा करती थीं…,
ब्राह्मणो का कहॉ दोष है…. हॉ ब्राह्मणो का दोष यह जरूर है कि उसने अपने ऊपर लगाये गये निराधार आरोपो का कभी खंडन नहीं किया, जो ब्राह्मणो के अपमान का कारण बन गया।
इस तरह जब समाज के हर वर्ग की उपस्थिति हो जाने के बाद ब्राह्मण नाई से पूछता था कि क्या सभी वर्गों की उपस्थिति हो गयी है ?

★ नाई के हॉ कहने के बाद ही ब्राह्मण मंगल पाठ प्रारम्भ करता था।
ब्राह्मणो द्वारा जोड़ने की क्रिया छोड़कर हम लोगों ने दोष ब्राह्मणो पर ही लगा दिया।
ब्राह्मणो को यदि अपना खोया हुआ वह सम्मान प्राप्त करना है तो इन दुराग्रही  वक्ताओ के वक्तव्यो पर रोक लगानी होगी ।
सामाजिक परंपरा की विरोधी “सेकुलर ताकतों” का विरोध करना होगा, जो अपनी अज्ञानता छिपाने के लिये वेद और ब्राह्मण की निन्दा करतेे हुये पूर्ण भैतिकता का आनन्द ले रहे हैं।

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