तुलसी पूजन-विधि

*तुलसी का पौधा घर मे अवश्य लगायें.*
*🌿सरल तुलसी पूजन-विधि🌿*
सामग्री:
तुलसी का पौधा, पीला या लाल वस्त्र.
थाल, गिलास या कटोरी, रोली- चंदन या कुमकुम, तुलसी दल, कलावा, धूपबत्ती, कपूर, दीपक, फूल, फल, मेवे, गंगाजल, अक्षत आदि
*सुबह स्नानादि के बाद घर के स्वच्छ स्थान पर तुलसी के गमले को जमीन से कुछ ऊँचे स्थान पर रखें.*
*घर में अगर तुलसी का पौधा नहीं है तो नीचे दिए मंत्र बोलते हुए गमले में तुलसी रोपें फिर पीले या लाल वस्त्र से ढकें.*
*महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी*
*आधि व्याधि हरा नित्यम् तुलसी त्वाम् नमोस्तुते*
आचमन:-
निम्न मंत्र बोलते हुए तीन बार चम्मच से आचमन करें
*ॐ केशवाय नमः*
*ॐ नारायणाय नमः*
*ॐ माधवाय नमः*
*ॐ गोविंदाय नमः*
स्वयं पर जल छिड़कें:
मंत्रः
*ॐ अपवित्रःपवित्रो वा* *सर्वावस्थां गतोऽपि वा,*
*यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः.*
परिवार सहित तिलक, कुंकुम लगायें. कुंकुम रोली फूल अर्पित कर गणेश जी का स्मरण व पूजन करें.
संकल्प करें:-
हाथ में अक्षत-पुष्प व जल लेकर सभी संकल्प करे –
इस पावन दिवस पर हम तुलसी-पूजन कर रहे हैं, इससे हमारा कल्याण हो । (कोई मनोकामना हो तो अवश्य बोले.)
अक्षत व पुष्प लेकर निचे लिखा मन्त्र बोलते हुए तुलसीजी पर धीरे धीरे अर्पण करते जायें.
*नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे,*
*नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके.*
तुलसी पर अक्षत चढाये ।
*ॐ भगवत्यै तुलस्यै नमः*
*ॐ विष्णुवल्लभायै नमः*
एक चम्मच जल चढ़ायें
*ॐ तुलसी दैव्यै नमः पाद्यं समर्पयामि.*
आचमन :-
*ॐ दैत्यान्तकृत्प्रियायै नमः आचमनं समर्पयामि*
स्नान :- जल चढायें
*स्नानार्थे जलं समर्पयामि*
वस्त्र :- वस्त्र कलावा (रक्षासूत्र) चढाये.
*ॐ तुलसी देव्ये नमः*
रोली चंदन का तिलक करे। पुष्प चढाये।
*ॐतुलस्यै नमः ॐ रमावासायै नमः*
धूप :- धूप दीपक जलाये.
*ॐ पापहारिण्यै नमः*
नैवेद्य चढाये, फल केला चढाये.
*ॐ अमृतसम्भूतायै नमः*
दक्षिणा चढाये ।
*ॐ अमृतरूपिण्यै नमः*
तुलसीजी की आरती करें.
पष्पांजलि सारे पुष्प चढाये.
*ॐ परमेश्वर्यै नमः*
तुलसी नामाष्टक का पाठ करें ।
*वृन्दां वृन्दावनीं विश्वपावनीं विश्वपूजिताम्*
*पुष्पसारां नन्दिनीं च तुलसीं कृष्णजीवनीम्*
*एतन्नामाष्टकं चैतत्स्तोत्रं नामार्थसंयुतम्*
*यः पठेत्तां च संपूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत.*
(वृंदा, वृंदावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी. ये तुलसी देवी के आठ नाम हैं.)
🌿जो तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है.
( ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खण्ड :२२.३२-३३)
प्रदक्षिणा :- तुलसी जी की सात परिक्रमा करें.
*यानि कानि च पापानि जन्मान्तर कृतानि च,*
*तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणा पदे पदे.*
क्षमा प्रार्थना :-  :
*आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्,*
*पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि.*
*मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि,*
*यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे.*
कलावा बाधें :
*येन बद्धो बलि राजा दान्वेन्द्रो महाबलः।तेन मे त्वं बंध्यामि रक्षे माचल माचलः।*

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