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चाण्डाल योग या दोष

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | ज्योतिष सीखें

*बृहस्पति और राहु जब साथ होते हैं या फिर एक दूसरे
को किन्ही भी भावो में बैठ कर देखते हो,
तो गुरू चाण्डाल योग निर्माण होता है। चाण्डाल का अर्थ निम्नतर
जाति है। कहा गया कि चाण्डाल
की छाया भी ब्राह्मण को या गुरू को अशुद्ध
कर देती है। गुरु चंडाल योग को संगति के उदाहरण से
आसानी से समझ सकते हैं। जिस प्रकार कुसंगति के
प्रभाव से श्रेष्ठता या सद्गुण भी दुष्प्रभावित हो जाते
हैं। ठीक उसी प्रकार शुभ फल कारक गुरु
ग्रह भी राहु जैसे नीच ग्रह के प्रभाव
से अपने सद्गुण खो देते है। जिस प्रकार हींग
की तीव्र गंध केसर की सुगंध
को भी ढक लेती है और स्वयं
ही हावी हो जाती है,
उसी प्रकार राहु अपनी प्रबल
नकारात्मकता के तीव्र प्रभाव में गुरु
की सौम्य,
सकारात्मकता को भी निष्क्रीय कर देता है।
राहु चांडाल जाति, स्वभाव में नकारात्मक तामसिक गुणों का ग्रह है,
इसलिए इस योग को गुरु चांडाल योग कहा जाता है। जिस जातक
की कुंडली में गुरु चांडाल योग यानि कि गुरु-
राहु
की युति हो वह व्यक्ति क्रूर, धूर्त, मक्कार, दरिद्र
और कुचेष्टाओं वाला होता है। ऐसा व्यक्ति षडयंत्र करने वाला,
ईष्र्या-द्वेष, छल-कपट आदि दुर्भावना रखने वाला एवं कामुक
प्रवत्ति का होता है, उसकी अपने परिवार जनो से
भी नही बन पाती तथा वह
खुद को अकेला महसूस करने लग जाता है और उसका मन
हमेशा व्याकुल रहता है।
उपाय – गुरु चांडाल योग के जातक के जीवन पर
जो भी दुष्प्रभाव पड़ रहा हो उसे नियंत्रित करने के
लिए
जातक को भगवान शिव
की आराधना करनी चाहिए। एक
अच्छा ज्योतिषी कुण्डली देख कर यह
बता सकता है कि हमे गुरु को शांत करना उचित रहेगा या राहु के
उपाय जातक से करवाने पड़ेंगे। अगर चाण्डाल दोष गुरु या गुरु के मित्र
की राशि या गुरु की उच्च राशि में बने तो उस
स्थिति में हमे राहु देवता के उपाय करके उनको ही शांत
करना पड़ेगा ताकि गुरु हमे अच्छे प्रभाव दे सके। राहु
देवता की शांति के लिए मंत्र-जाप पुरे होने के बाद हवन
करवाना चाहिए तत्पश्चात दान इत्यादि करने का विधान बताया गया है.
अगर ये दोष गुरु की शत्रु राशि में बन रहा हो तो हमे
गुरु और राहु देवता दोनों के उपाय करने चाहिए गुरु-राहु से संबंधित
*मंत्र-जाप, पूजा, हवन तथा दोनों से सम्बंधित वस्तुओं का दान
करना चाहिए।*

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