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ग्रह और ऊर्जा

astroadmin | December 30, 2018 | 0 | सामान्य जानकारी

आज कल जनमानस मे यह दुष्प्रचार है कि कोई भी ग्रह की पूजा करने से ग्रह शांत कैसे होता है और मंदिर मे  भगवान होते है या नही होते है ग्रह तो आकाश मे होते है परंतु इनका प्रभाव मनुष्य के जीवन पर कैसे होता है

ऊर्जा(energy) शब्द सम्भवतः प्रत्येक मनुष्य ने सुना होगा इसका अस्तित्व पूरे ब्रहमांड मे है यह सिर्फ मह्सूस किया जा सकता है जैसे हम गोवा या मनाली जैसे स्थानो पर जाते है तो हमारे मन मे कामुक्ता जैसे स्वभाव हो जाता है परंतु हम अगर अयोध्या और हरिद्वार जैसे स्थानो पर जाते है तो हमे शांति और मन पवित्र होने कि अनुभूति होता है यह ऊर्जा दो तरह के होते है पहला है सकारात्मक ऊर्जा(positive energy) और दूसरा है नकारात्मक ऊर्जा (negative energy)

आप कभी कुछ ऐसी स्थानो पर जाते है जहा आपको अकेले जाने मे डर लगता है वह जगह आपको भयावह लगता है क्यूकि वहा पर नकारात्मक ऊर्जा है और उसके प्रति आपके मन मे कही न कही से बुरी बाते सुनने को मिली है यह बाते ही आपके मन मे उसके प्रति नकारात्मक भावनाये उत्पन्न करती है उस जगह को ले कर आपके मन मे जो भावनाये उत्पन्न हुई है वह नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है परंतु आप मंदिर मे जाते है और आपकी आस्था वहा के प्रति है तो वहा पर आपके मन मे की गई प्रार्थना पूर्ण होती है वह मंदिर तो प्रारम्भ मे सिर्फ रेत और पथ्थर के अतिरिक्त और कुछ नही था परंतु वहा पर लोगो कि आस्था कि वजह से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हुई ,ऊर्जा सम्पूर्ण ब्रह्मांड मे है जिस तरह से प्रत्येक जीव या स्थानो मे ऊर्जा होती है वैसे ही प्रत्येक ग्रह मे ऊर्जा होती है जिसे हम ग्रह कि रश्मियाँ कहते है जैसे सूर्य मे किरण होता है और यह प्रत्येक वस्तुओ के लिये आवश्यक है वैसे ही प्रत्येक ग्रह की अपनी अपनी किरण या रश्मियाँ होती है

 जब किसी जीव का जन्म होता है तो उसके उपर ग्रह की ऊर्जा का कितना प्रभाव हुआ यह जन्म कालीन ग्रह से पता चल जाता है जिसे हम ग्रह का अंश बोलते है जो (30 degree) का होता है वही ग्रह अपनी रश्मिया पृथ्वी पर डालती है तो जीव का स्वाभाव समयानुसार परिवर्तित होता है यहा पर कुछ पथ्थर (stone) है जो ग्रहो कि रश्मियो को अपनी तरफ आकर्शित करती है

 अगर ज्योतिष गलत होता तो हमारे यहा बहुत पूर्व मे यह बता दिया जाता है कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण कब होगा और भी बहुत सी बाते है जो ज्योतिष मे बहुत पहले बता दिया जाता है गणित ज्योतिष पूर्णत: सत्य होता है परंतु फलित मे समस्या यह हो रही है कि हम अभी तक वही पूरानी सूत्रो पर ही कार्य कर रहे है इसमे सोधन की आवश्यकता है जिस वजह से कुछ फलित गलत हो जा रहे है परंतु अभी भी 90% सत्य हो रहे है

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