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गृह  सुख योग

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | ज्योतिष सीखें

 

1-यदि चतुर्थेश चतुर्थ भाव में हो अथवा लग्नेश चतुर्थ में हो या लग्नेश चतुर्थ का स्थान परिवर्तन हो एवं उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो जातक को उत्तम कोठी भवन
आवास आदि का सुख होता है।

2-यदि चतुर्थेश स्वग्रही, स्वनवांश या स्वोच्च में हो तो भूमि ,भवन,वाहन तथा घर एवं संगीतादि साधनों का सुख मिलता है।

3-यदि चतुर्थेश केन्द्र या त्रिकोण में हो एवं शुभ दृष्ट/युत हो तो #मनुष्य को आरामदायक,कार्यसाधक घर की प्राप्ति होती है।यदि चतुर्थेश विपरीत स्थिति में हो अर्थात् 6,8,12 आदि अनिष्ट भावों में हो तो घर का सुख नही मिलता।

4- यदि चतुर्थेश व #दशमेश साथ-साथ किसी केन्द्र या त्रिकोण में हों तो जातक का सुन्दर, बड़ा ,महलनुमा ,सुन्दर परकोटे से युक्त #सुसज्जित घर होता है।

5-यदि चतुर्थेश शुभ ग्रह हो तथा किसी अन्य शुभ ग्रह से दृष्ट या युक्त हो एवं लग्न में बुध हो तो मनुष्य उत्तम भवन वाहन से युक्त अपने कुल में पूज्य होता है।

नोट-#घर, जमीन, #जायदाद के लिए चतुर्थेश ,चतुर्थ भाव ,अष्टम भाव (भावात् भावम्)  भूमि कारक मंगल , उत्तमता का विचार गुरु से तथा  सुख संसाधनों ,वाहन आदि का विचार #शुक्र से करे

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