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किस माला से किसकी करें साधना?

astroadmin | March 18, 2018 | 0 | सामान्य जानकारी

साधनाओं के लिए विभिन्न प्रकार की मालाओं का प्र्रयोग किया जाता है। मुख्यतः यह मालाएं- रूद्राक्ष स्फटिक, हल्दी, कमलगट्टा, पुत्र जीवा, तुलसी, सफेद व लाल चन्दन, वैजन्ती तथा नवरत्न की बनी होती हैं।
रुद्राक्ष माला- यह माला शिव पूजा के लिये सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। तुलसी, चन्दन, स्वर्ण, मुक्ता, प्रवाल आदि की माला से करोड़ों गुना अधिक फल रूद्राक्ष माला पर जाप करने से प्राप्त होता है। हृदय रोग, ब्लड प्रेशर (रक्त चाप) आदि से यह रक्षा करती है, अकाल मृत्यु योग को टालने की अभूतपूर्व शक्ति इसमें है।
स्फटिक माला- यह माला शक्ति की प्रतीक लक्ष्मी-सरस्वती व दुर्गा जाप के लिये उत्तम है। गायत्री मंत्र के लिये भी यह सर्वोत्तम है। संक्षेप में देवी जाप के लिये स्फटिक माला के उपयोग से मंत्र शीघ्र सिद्ध होता है। यह आर्थिक स्थिति में सुधार लाती है। उच्च रक्त चाप के रोगियों को व क्रोध शान्ति के लिये यह माला अचूक है।
सफेद चन्दन- इस माला का प्रयोग शान्तिपुष्टि कर्मों में व श्री राम, विष्णु व अन्य देवताओं की उपासना में होता है। इसके धारण करने से शरीर में ताजगी स्फूर्ति का संचार होता है।
लाल चन्दन- देवी जाप के लिये यह सर्वोत्तम माला मानी गयी है। मंगल शान्ति के लिये लाल चन्दन की माला धारण करना लाभकारक है।
तुलसी माला- विष्णु प्रिय तुलसी की माला विष्णु अवतार राम व कृष्ण जी की उपासना हेतु सर्वाेत्तम है। शरीर व आत्मा की शुद्धि के लिये यह माला धारण करना उत्तम है।
मूगे की माला- मंगल ग्रह की शान्ति की लिये इसे धारण करना उपयुक्त है व हनुमान जी की साधना के लिये यह सर्वोत्तम है।
वैजयन्ती माला- वैष्णव भक्तों व लक्ष्मी जाप में प्रयोग की जाती है।
कमल गट्टे की माला- लक्ष्मी प्राप्ति व लक्ष्मी जाप के लिये सर्वोत्तम है।
पुत्र जीवा की माला- इसका प्रयोग संतान प्राप्ति के लिए की जाने वाली साधनाओं में होता है।
स्फटिक व रूद्राक्ष मिश्रित माला- रूद्राक्ष व स्फटिक माला शिवशक्ति का प्रतीक हैं। रूद्राक्ष लो ब्लड़ प्रेशर (निम्न रक्त चाप) को व स्फटिक हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्त चाप) को नियन्त्रित करता है अर्थात् दोनों में समन्वय बनाए रखता है। इस माला पर शिव व शक्ति दोनों का जाप किया जा सकता है।
रूद्राक्ष व सोने के दानों की माला- रूद्राक्ष के साथ सोने के दाने रूदाक्ष की शक्ति में कई गुना वृद्धि करते हैं। सोना सबसे शुद्ध धातु है। धारक को रूद्राक्ष के गुणों के साथ-साथ शान्ति व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
नवरत्न माला- यह नवग्रह की शान्ति के लिये धारण की जाती है, इससे मानसिक शान्ति की प्राप्ति होती है।
मोती माला- मोती की माला भाग्य-वृद्धि करती है। पुत्र प्राप्ति के लिये यह उत्तम है।
हल्दी की माला- बृहस्पति के व बगलामुखी के जाप केवल इसी माला पर कारगर हैं

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