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उच्च अधिकारी बनने के योग

astroadmin | March 19, 2018 | 0 | ज्योतिष सीखें

हर व्यक्ति की यह तमन्ना होती है कि वह बड़े से बड़ा पद हासिल करे_ _लेकिन कई बार सारी योग्यता के बाद भी वह उच्च अधिकारी नहीं बन पाता। ऐसे में जरूरी है कि अपनी_ _जन्म पत्रिका में उच्च अधिकारी बनने के योग तलाशे जाए। यहां कुछ ग्रह योग दिए जा रहे हैं जिनके आधार पर_ _आप जान सकते हैं कि क्या आप बन सकते हैं उच्च अधिकारी।_
_कुछ योग ग्रहों की विशेषता के आधार पर बनते हैं और कुछ राशियों की_ _विशेषता के आधार पर। कुंडली में ग्रह की स्थिति जितनी प्रबल होगी, योग भी उतना ही प्रभावकारी होता जाएगा। अच्छे योग की मजबूती देखने के साथ ही कुंडली में विपरीत_ _योग पर भी अवश्य दृष्टि डालनी चाहिए और शुभाशुभ का निष्कर्ष निकालना चाहिए।_
*उच्च पदाधिकारी योग*:-
1. यदि कुंडली में स्थिर लग्न हो और लग्न में शुक्र स्थित हो, तो मात्र इस योग से जातक उच्च पदाधिकारी बन सकता है। शुक्र की स्थिति जितनी अच्छी होगी, उसी के अनुसार उच्च पद प्राप्त होगा।
2. यदि कुंडली में चर लग्न हो और लग्नेश से केंद्र में बृहस्पति स्थित हो, तो यह योग भी जातक को उच्च पदाधिकारी बना देता है। बृहस्पति की स्थिति के अनुसार ही उच्च पद प्राप्त होगा।
3. यदि कुंडली में द्विस्वभाव लग्न हो और लग्न के ‍त्रिकोण में मंगल हो, तो यह योग भी जातक को उच्च पदाधिकारी बना देता है।
(उपरोक्त तीनों योगों में योग बनाने वाला ग्रह अस्त नहीं होना चाहिए और दूसरे यह जितना अधिक बलवान होगा, उतना ही अधिक शुभ फलदायी होगा।)
4. यदि कुंडली में लग्नेश दशम भाव में तथा दशमेश लग्न में स्थित हो तथा बृहस्पति से दृष्ट हो, तो जातक उच्च पदासीन होता है।
5. जिस राशि में नवमेश हो, उसका स्वामी जिस राशि में है, उस राशि का स्वामी यदि उच्च राशि में हो तथा लग्नेश लग्न से केंद्र में शुभ ग्रह से युत हो, तो यह योग भी जातक को उच्च पदाधिकारी बना देता है।
6. नवमेश जिस राशि में हो, उस राशि का स्वामी यदि अपनी उच्च राशि में स्थित होकर लग्न से दूसरे भाव में हो तथा धनेश अपनी उच्च राशि में हो, तो इस योग वाला जातक भी उच्च पदाधिकारी होता है।
7. यदि कुंडली में दशम भाव में चंद्रमा स्थित हो तथा दशमेश अपनी उच्च राशि में हो एवं भाग्येश लग्न से द्वितीय भाव में हो, तो इस योग में उत्पन्न जातक भी उच्च ‍अधिकार प्राप्त करता है।
8. यदि कुंडली में पंचम तथा एकादश भाव में (दोनों भावों में) सौम्य ग्रह स्थित हों तथा दूसरे व आठवें भाव में पाप ग्रह हों, तो इस योग में जन्म लेने वाला जातक भी उच्च पदाधिकारी होता है।
9. कुंडली में यदि सभी सातों ग्रह मेष, कर्क, तुला व मकर, इन राशियों में हों, (इनमें एक ही में, दो में, तीन में या चारों में हों) तो इस योग में जन्म लेने वाला जातक भी उच्च पदवी प्राप्त करने वाला होता है।
10. यदि बृहस्पति द्वितीय भाव या नवम भाव का स्वामी हो तथा नवमेश जिस नवांश में हो, उसका स्वामी बृहस्पति से युत हो एवं दोनों द्वितीय भाव में स्थित हों, तो इस योग में जन्म लेने वाला जातक भी उच्च पदवी प्राप्त करने वाला होता है।
यह योग केवल मेष, कर्क, वृश्चिक व कुंभ लग्न वाली कुंडलियों पर ही लागू हो सकता है।
11. यदि लग्न से दशम भाव में सूर्य स्थित हो तथा दशमेश लग्न से तीसरे भाव में स्थित हो, तो इस योग में उत्पन्न व्यक्ति भी उच्च पदाधिकारी होता है।
12. यदि चंद्रमा व बृहस्पति दोनों लग्न से द्वितीय भाव में स्थित हों, द्वितीयेश लाभ भाव में हो तथा लग्नेश शुभ ग्रह से युत हो, तो इस योग में उत्पन्न जातक उच्च पदाधिकारी होता है।
13. यदि कुंडली में नवमेश व दशमेश का परस्पर स्थान विनिमय हो (अर्थात नवमेश दशम भाव में तथा दशमेश नवम भाव में हो) तथा लग्नेश नवम या दशम भाव में हो तथा लग्नेश पर बृहस्पति की दृष्टि हो, तो इस योग वाला व्यक्ति भी उच्च पदाधिकारी होता है।
14. यदि मकर लग्न कुंडली में लग्न से पंचम में चंद्रमा, सप्तम में सूर्य व बुध हों, अष्टम भाव में गुरु व शुक्र हों तथा एकादश भाव में शनि हो, तो जातक उच्च पदाधिकारी होता है।
15. कुंडली में मंगल जिस राशि में स्थित हो, उससे दूसरे, पांचवें या नौवें स्थान में बुध तथा शुक्र हों तथा शनि तुला राशि का दशम में हो, तो इस योग वाला जातक भी उच्च पदाधिकार प्राप्त करता है। यह योग केवल मकर लग्न कुंडली पर ही लागू हो सकता है।
16. मिथुन लग्न कुंडली में दशम भाव में गुरु व शुक्र स्थित हों, तो इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति उच्च पदाधिकारी होता है।
17. मकर लग्न कुंडली में पंचम भाव में चंद्रमा हो, लग्न में बुध व शुक्र तथा नवम भाव में बृहस्पति हो, तो जातक उच्च स्तरीय अधिकारी होता है।
18. धनु लग्न कुंडली में बृहस्पति बारहवें भाव में तथा शनि लाभ भाव में होने से भी जातक उच्च पदाधिकारी बन जाता है।
19. यदि कुंडली में लग्नेश तथा चंद्र (चंद्रमा जिस राशि में हो, उसका स्वामी) दोनों केंद्र में अपने मित्र की राशि में युत हों तथा लग्न बलवान हो, तो इस योग में जन्म लेने वाला जातक भी इस योग के प्रभाव से उच्च पदाधिकारी बन जाता है।
20. कुंभ लग्न की कुंडली में तीसरे भाव में उच्च राशि का सूर्य बैठा होने पर भी जातक उच्च पदाधिकारी बन जाता है।
21. तुला लग्न कुंडली में अष्टम भाव में बृहस्पति, नवम भाव में शनि तथा ग्यारहवें भाव में मंगल तथा बुध हो, तो इस योग वाला व्यक्ति भी उच्च पदाधिकारी होता है।
22. धनु लग्न कुंडली में सूर्य व बृहस्पति दोनों ही दशम भाव में स्थित हों, तो जातक उच्च पदाधिकारी होता है।
23. यदि कुंडली में मंगल अपनी उच्च राशि या स्वराशि का होकर दशम भाव में बैठा हो तथा उस पर लग्नेश की दृष्टि भी हो, तो जातक उच्च पदाधिकारी होता है।
24. कुंडली में मंगल, सूर्य, बुध, बृहस्पति, शनि, दशम भाव तथा दशमेश- इन सबकी स्थिति जितनी अच्छी होगी, उसी के अनुसार जातक को उच्चाधिकार प्राप्त होता है।

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