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इन दैवीय अस्त्रों में थी ब्रह्माण्ड के विनाश की शक्ति

astroadmin | July 22, 2018 | 0 | अध्यात्म और धर्म

पौराणिक इतिहास
हिन्दू धर्म से जुड़ा पौराणिक इतिहास बेहद व्यापक है। अलग-अलग युगों में इस इतिहास में बहुत से चरित्रों का समावेश होता रहा है। साहसी और महान योद्धाओं की इस दास्तां में चमत्कार और अलौकिक अस्त्र-शस्त्रों का भी प्रयोग किया जाता रहा है।
अस्त्र और शस्त्र
संपूर्ण पौराणिक इतिहास में हम कई अस्त्रों और शस्त्रों का जिक्र सुनते हैं जिनका एक बार किया गया प्रयोग पूरी की पूरी शत्रु सेना या ब्रह्मांड तक के विनाश का कारण बन सकता था। यह अस्त्र इतने प्रभावपूर्ण होते थे कि देवता तक इनके उपयोग की बात सुनकर भी कांप उठते थे।
दिव्य हथियार
हिन्दू धर्म में दिव्य हथियारों को अस्त्रों का नाम दिया गया है। चलिए आपको हिन्दू पौराणिक कथाओं में प्रयोग किए जाने वाले अस्त्रों के बारे में बताते हैं और साथ ही आपको ये भी बताते हंं कौन सा अस्त्र किस देवता द्वारा संचालित है और उसका तोड़ क्या है।
इन्द्र अस्त्र
इंद्र अस्त्र इन्द्र देवता द्वारा संचालित किया जाता है। इसका एक बार किया गया प्रयोग आसमान से बाणों की वर्षा कर देता है।
अंतर्ध्यान अस्त्र
इन्द्र अस्त्र का तोड़ है अंतर्ध्यान अस्त्र जो बाण चलाने वाले के मन को भ्रमित कर उसे बाण ना चलाने के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा अंतर्ध्यान अस्त्र बाणों के वार को गायब कर देता है। यह अस्त्र अन्य बाणों के वार को भी काट सकता है।
आग्नेय अस्त्र
अग्नि देव द्वारा संचालित इस अस्त्र का प्रयोग एक ही बार में हर जगह आग को फैलाने के लिए किया जाता है। इस अस्त्र का सामना सिर्फ वरुण यानि जल अस्त्र ही कर सकता है।
वरुण अस्त्र
यह अस्त्र वरुण यानि जल देवता द्वारा संचालित किया जाता है। इसका प्रयोग करने से एक ही बार में बड़ी मात्रा में पानी को प्रवाहित किया जा सकता है। मुख्यत: इस अस्त्र का प्रयोग आग्नेय अस्त्र के प्रभाव को रोकने के लिए किया जाता है।
नाग अस्त्र
यह अस्त्र नागों के देवता द्वारा संचालित है। यह बाण छूटते ही नाग का रूप लेकर अपने शत्रु की जान ले लेता है।
गरुण अस्त्र
सामान्यत: गरुण को नाग का शत्रु माना गया है इसलिए नाग अस्त्र के प्रभाव को भी सिर्फ और सिर्फ गरुण अस्त्र द्वारा ही काटा जा सकता है।
नाग पाश
यह अस्त्र भी नागों द्वारा ही संचालित है। इसका एक बार का प्रयोग आसमान से सैकड़ों जिन्दा सांपों की बारिश कर सकता है।
रामायण में प्रयोग
रामायण के युद्ध में इन्द्रजीत यानि मेघनाथ द्वारा राम और लक्ष्मण के ऊपर नाग पाश का प्रयोग किया गया था।
वायु अस्त्र
पवन देव द्वारा संचालित इस अस्त्र का प्रयोग करने से वायु तेज हवा में बहने लगती थी। वायु की गति इतनी तेज होती थी कि दुश्मन तक कांप उठते थे।
सूर्य अस्त्र
सूर्य देव द्वारा संचालित इस अस्त्र से अंधकार पूरी तरह गायब हो जाता था और चारों तरफ सिर्फ रोशनी रहती थी।

मोहिनी अस्त्र
विष्णु के स्त्री अवतार मोहिनी द्वारा संचालित इस अस्त्र के प्रयोग से आसपास के वातावरण को माया या मोह मुक्त किया जा सकता था।
त्वश्तर अस्त्र
इस अस्त्र के संचालक थे दिव्य निर्माता, त्वश्तरी। इसका प्रयोग विरोधी सेना के लोगों को एक दूसरे के साथ लड़ने के लिए विवश कर देता था।

सम्मोहनअस्त्र
इसका प्रयोग महायोद्धाओं तक को यह भूलने के लिए मजबूर कर सकता था कि वह किससे और किस उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं। जो इस अस्त्र को चलाता उसी के मोहपाश में बंधकर सब रह जाते थे।
प्रज्न अस्त्र
यह अस्त्र चलाकर सम्मोहन अस्त्र का प्रभाव समाप्त किया जा सकता था ताकि सभी जन अपनी चेतना वापस पा सकें।
ब्रह्मास्त्र
यह अस्त्र सबसे अधिक खतरनाक था। यह हर प्रकार के अस्त्रों के प्रभाव को काट सकता था। इसके संचालक स्वयं ब्रह्मा थे। इस अस्त्र का काट किसी के भी पास नहीं था।

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